EPFO latest update 2025, EPFO ने EPS नियम बदला: अब 1 महीने की नौकरी पर भी पेंशन का हक, 6 महीने से कम सेवा वालों को बड़ी राहत मिली.
EPFO 2025 Update – क्या बदला है?
EPFO Latest News: EPFO ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सदस्य ने सिर्फ एक माह भी नौकरी की है और EPS में योगदान जमा हुआ है, तो उसे पेंशन का अधिकार मिलेगा; पहले 6 महीने से कम सेवा को ‘जीरो कम्प्लीट ईयर’ मानकर पेंशन हिस्से को मान्यता नहीं मिलती थी. यह बदलाव अप्रैल–मई 2024 में जारी आंतरिक सर्कुलर के जरिए लागू स्पष्ट किया गया, जिससे कम अवधि की नौकरी करने वालों का EPS हिस्सा अब नहीं अटकेगा. कई फिनटेक व मीडिया रिपोर्ट्स ने भी पुष्टि की है कि 6 महीने से कम सेवा पर भी EPS राशि दावे योग्य होगी, बशर्ते कम से कम एक माह का योगदान दर्ज हो.
किसे होगा सीधा फायदा?
EPFO Latest News: यह नियम खासकर उन सेक्टरों के लिए राहत है जहां नौकरी छोड़ने-लगने की गति तेज रहती है, जैसे BPO, लॉजिस्टिक्स, रिटेल, डिलीवरी और कॉन्ट्रैक्ट स्टाफिंग; अब इन क्षेत्रों में अल्पकालिक नौकरी करने वाले भी अपने EPS हिस्से पर दावा कर सकेंगे. पहले 1 से 5 महीने काम करने वालों की EPS रकम व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय हो जाती थी, पर अब योगदान पेंशन अधिकार में जुड़ जाएगा. EPFO के प्रकाशनों में भी EPS सेवा-गणना की रूपरेखा दी गई है, और नई स्पष्टता से अल्प सेवा अवधि की अनदेखी से होने वाला नुकसान रुक सकेगा.
पहले का नियम क्यों मुश्किल था
EPFO Latest News: पुराने नियम के तहत 6 महीने से कम सेवा को पूरा साल नहीं माना जाता था, जिससे EPS का हिस्सा फॉरफिट जैसा हो जाता और सिर्फ EPF रकम मिलती थी. यह स्थिति उन लोगों के लिए अन्यायपूर्ण मानी जाती थी जो स्वास्थ्य, प्रशिक्षण या निजी कारणों से जल्दी नौकरी छोड़ते थे. अब एक माह में भी योगदान होने पर EPS हिस्सा दावा योग्य होने से युवाओं और प्रशिक्षुओं की सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी.
अब दावा कैसे करें
EPFO Latest News: नौकरी छोड़ने के बाद EPS हिस्से के लिए Form 10C के जरिए दावा किया जा सकता है; यह वही फॉर्म है जिससे 10 साल से कम सेवा वालों का EPS निकासी दावा होता है. सबसे पहले PF पासबुक में EPS योगदान की एंट्री देखें; यदि भुगतान में EPS हिस्सा नहीं जोड़ा गया हो, तो 2024 की स्पष्टता का हवाला देकर EPFO में शिकायत दर्ज कराएं और पासबुक का स्क्रीनशॉट/पीडीएफ संलग्न करें. EPFO की मैनुअल/दस्तावेज़ी प्रक्रिया के अनुसार कागजात का सत्यापन होता है और योग्य राशि बैंक खाते में जमा की जाती है.
एक सरल उदाहरण
मान लें किसी कर्मचारी ने जनवरी 2024 में जॉइन कर अप्रैल 2024 में इस्तीफा दिया—कुल चार महीने काम किया; पहले नियम में उसके EPS हिस्से को मान्यता नहीं मिलती थी. अब नई स्पष्टता के बाद चार महीने का EPS योगदान भी देय हो सकता है और सदस्य Form 10C से इसे क्लेम कर सकता है. ऐसा बदलाव नौकरी बदलने की शुरुआत में होने वाले आर्थिक घाटे को कम करेगा और भरोसा बढ़ाएगा.
ध्यान रखने वाली बातें
EPS की दीर्घकालिक पेंशन पाने के लिए सामान्यतः 10 साल की पात्र सेवा और 58 वर्ष की आयु मानदंड रहते हैं; कम सेवा पर फुल पेंशन नहीं, बल्कि EPS अंश का दावेदारी/निकासी पक्ष लागू होता है. EPF/EPS योगदान संरचना में नियोक्ता के 12% में से 8.33% EPS में जाता है, जो अधिकतम वेतन-सीलिंग पर गणना होता है—यह समझना पासबुक मिलान में मददगार है. EPFO के आधिकारिक दस्तावेज सेवा-गणना और औसत वेतन जैसी तकनीकी बातों को भी परिभाषित करते हैं, जो विवाद की स्थिति में संदर्भ बनते हैं.
क्यों ये बदलाव जरूरी थे?
भारत में अस्थायी और कॉन्ट्रैक्ट नौकरियां बढ़ रही हैं; ऐसे में छोटी सेवा अवधि पर EPS हिस्से का बेकार हो जाना सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य के खिलाफ था. नई व्यवस्था से हर जमा रुपया मायने रखेगा और युवाओं को नौकरी बदलने पर भी मनोवैज्ञानिक और वित्तीय सहारा मिलेगा. मीडिया और फाइनेंस प्लेटफॉर्म्स ने इसे छोटे कार्यकाल वाले कर्मचारियों के लिए बड़ा राहत कदम बताया है.