PEA Act 2024 in Hindi: SSC ने ऑनलाइन पेपर शेयर करने पे लगाई रोक, होगी कारवाई

स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी करते हुए सभी अभ्यर्थियों, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को सूचित किया है कि अब परीक्षा के बाद प्रश्नपत्रों की चर्चा, एनालिसिस या साझाकरण पर सख्त पाबंदी है।

नया कानून – PEA Act 2024

पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट क्या है?

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 एक नया कानून है जो फरवरी 2024 में बनाया गया था और जून 2024 में लागू हुआ है। यह कानून बनाने का मुख्य कारण देश में बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षाओं में धोखाधड़ी के मामले थे।

कानून के तहत कौन सी गतिविधियां प्रतिबंधित हैं?

इस कानून के अनुसार निम्नलिखित कार्य गैरकानूनी हैं:

धारा 3 – अनुचित साधन: बिना अनुमति के परीक्षा पत्रों, उत्तर कुंजी या परीक्षा से जुड़ी सामग्री का लीक करना, बताना, रखना या फैलाना

धारा 9 – अपराध की प्रकृति: इस एक्ट के तहत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य हैं

सजा के प्रावधान

व्यक्तिगत उल्लंघन के लिए:

  • 3 से 5 साल तक की जेल
  • 10 लाख रुपए तक का जुर्माना

संस्थानों के लिए:

  • 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना
  • भविष्य की परीक्षाओं से प्रतिबंध
  • संस्था की ब्लैकलिस्टिंग

संगठित अपराध के लिए:

  • 5 से 10 साल तक की जेल
  • कम से कम 1 करोड़ रुपए का जुर्माना

SSC की चेतावनी के कारण

पेपर लीक की समस्या

पिछले 5 सालों में भारत के 16 राज्यों में 48 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं जिससे करोड़ों छात्रों का नुकसान हुआ है। इनमें शामिल हैं:

  • राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा
  • बिहार पुलिस कांस्टेबल परीक्षा
  • NEET और अन्य प्रवेश परीक्षाएं

सोशल मीडिया पर एनालिसिस की समस्या

SSC ने देखा कि कई लोग और कोचिंग संस्थान परीक्षा के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करते हैं। यह गतिविधि परीक्षा की गोपनीयता को भंग करती है और अन्य उम्मीदवारों के लिए अनुचित फायदा पैदा करती है।

किन प्लेटफार्मों पर लगी है पाबंदी?

सोशल मीडिया प्लेटफार्म

निम्नलिखित प्लेटफार्मों पर SSC पेपर की चर्चा करना अब गैरकानूनी है:

  • Facebook और Instagram
  • YouTube चैनल
  • WhatsApp ग्रुप्स
  • Telegram चैनल्स
  • Twitter और अन्य प्लेटफार्म

कंटेंट क्रिएटर्स के लिए खास चेतावनी

SSC ने विशेष रूप से यूट्यूब पर एनालिसिस वीडियो बनाने वाले, कोचिंग टीचर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को चेतावनी दी है। अब कोई भी पेपर एनालिसिस वीडियो, रील्स या पोस्ट बनाना कानूनी अपराध माना जाएगा।

छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया

शिक्षकों की चिंता

दिल्ली के SSC तैयारी कराने वाले शिक्षक प्रभंजन भदौरिया का कहना है कि यह फैसला स्वतंत्र रूप से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नुकसानदायक है। उनके अनुसार पुराने पेपर्स का अध्ययन छात्रों की तैयारी के लिए बहुत जरूरी होता है।

छात्रों की प्रतिक्रिया

कई छात्रों ने इस कदम को “तानाशाही” करार दिया है। गणित विशेषज्ञ अभिनय ने इसे “दोहरे मापदंड” बताया है, यह कहते हुए कि चुनाव के बाद एग्जिट पोल की चर्चा खुलेआम होती है लेकिन परीक्षा के बाद पेपर की चर्चा को अपराध माना जाता है

SSC के सुरक्षा उपाय

AI टेक्नोलॉजी का उपयोग

पेपर लीक को रोकने के लिए SSC ने नई तकनीक अपनाई है:

AI पावर्ड कंटेंट टूल: परीक्षा से केवल 15 मिनट पहले AI की मदद से प्रश्नपत्र तैयार होगा

डिजिटल वेरिफिकेशन: प्रश्नपत्र केवल सही उम्मीदवार के डिजिटल वेरिफिकेशन के बाद ही खुलेगा

एडवांस एन्क्रिप्शन: मजबूत डिजिटल सिक्योरिटी के साथ प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखा जाएगा

उम्मीदवारों के लिए जरूरी सावधानियां

क्या करें और क्या न करें

बिल्कुल न करें:

  • परीक्षा के बाद किसी भी सोशल मीडिया पर प्रश्नों की चर्चा
  • WhatsApp या अन्य ग्रुप्स में पेपर साझा करना
  • YouTube पर एनालिसिस वीडियो देखना या बनाना
  • किसी भी प्रकार की कोचिंग संस्थान की एनालिसिस क्लास में भाग लेना

सुरक्षित रहने के तरीके:

  • केवल अधिकारिक SSC वेबसाइट से जानकारी लें
  • किसी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट SSC को करें
  • परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने में सहयोग करें

परीक्षा प्रणाली में सुधार

पारदर्शिता के उपाय

सरकार का मानना है कि यह कानून सरकारी परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता लाएगा। इससे योग्य उम्मीदवारों को उचित मौका मिलेगा और अयोग्य लोगों को गैरकानूनी तरीकों से सफलता नहीं मिल सकेगी।

भविष्य की योजनाएं

SSC के चेयरमैन एस गोपालकृष्णन ने बताया कि यह सिर्फ SSC के लिए नहीं बल्कि भारत की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा बदलाव है। इससे UPSC, RRB, NTA और अन्य सभी सरकारी परीक्षाओं में सुधार आएगा।

निष्कर्ष

SSC का यह कदम भले ही कुछ लोगों को सख्त लगे, लेकिन यह परीक्षा प्रणाली की साफ-सफाई के लिए जरूरी है। छात्रों को समझना होगा कि यह नियम उनके हित में है क्योंकि इससे सभी को समान अवसर मिलेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि अब मेहनती छात्रों को धोखेबाजों से नुकसान नहीं होगा।

यह कानून न केवल पेपर लीक रोकेगा बल्कि परीक्षा के बाद होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों पर भी लगाम लगाएगा। सभी अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि वे इस नियम का पालन करें और भारत की परीक्षा प्रणाली को साफ और निष्पक्ष बनाने में योगदान दें।

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