नाम जाप करने के नियम: प्रेमानंद महाराज के अनुसार आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग


वृंदावन वाले पूज्य श्री हित प्रेमानंद जी महाराज आज के समय में लाखों युवाओं और साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। महाराज जी के अनुसार, ‘नाम जाप’ (Naam Jaap) केवल शब्दों का दोहराव नहीं है, बल्कि यह ईश्वर से जुड़ने का सबसे सरल और शक्तिशाली माध्यम है।

यदि आप भी नाम जाप का पूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो महाराज जी द्वारा बताए गए इन नियमों और अनुशासन का पालन करना अनिवार्य है।


1. वाणी की पवित्रता और मौन का महत्व

प्रेमानंद महाराज जी के अनुसार, नाम जाप की शक्ति तभी प्रकट होती है जब साधक अपनी वाणी पर नियंत्रण रखता है।

  • व्यर्थ की बातों से बचें: गप्पें मारना, दूसरों की बुराई (चुगली) करना और निंदा करना आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा को नष्ट कर देता है।
  • सत्य का पालन: सत्य बोलना आवश्यक है, लेकिन महाराज जी कहते हैं कि यदि किसी की रक्षा के लिए या अपनी साधना को गुप्त रखने के लिए सत्य छिपाना पड़े (बिना किसी स्वार्थ के), तो वह अनुचित नहीं है।

2. इन 5 दुर्गुणों का तुरंत त्याग करें

महाराज जी स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि यदि आप नीचे दिए गए पाप कर्मों में लिप्त हैं, तो नाम जाप का पूरा प्रभाव नहीं दिखेगा:

  1. चोरी: किसी का हक मारना या चोरी करना।
  2. हिंसा: किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाना।
  3. परस्त्री/परपुरुष गमन: व्यभिचार से दूर रहें।
  4. नशा: शराब या अन्य मादक पदार्थों का सेवन बुद्धि और साधना दोनों को भ्रष्ट करता है।
  5. असत्य: बिना कारण झूठ बोलना।

3. देह-अभिमान से मुक्ति (शरीर भाव का त्याग)

अक्सर हम खुद को ‘स्त्री’ या ‘पुरुष’ के शरीर के रूप में देखते हैं, जिससे काम, क्रोध और लोभ जैसे विकार पैदा होते हैं। महाराज जी के अनुसार, साधक को यह समझना चाहिए कि वह शरीर नहीं, बल्कि एक दिव्य आत्मा है। जब आप शरीर के भाव से ऊपर उठते हैं, तभी वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति शुरू होती है।

4. स्वधर्म का पालन

भगवद गीता का संदर्भ देते हुए महाराज जी समझाते हैं कि अपने धर्म (कर्तव्य) का पालन करना, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो, दूसरे के धर्म को अपनाने से बेहतर है। अर्जुन का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि अपने निर्धारित कर्तव्यों से भागना कायरता है।


नाम जाप के दौरान होने वाली कठिनाइयां और उनके संकेत

स्थितिमहाराज जी का मार्गदर्शन
मानसिक अशांतिजप के समय मन में हलचल होना पुराने पापों के नष्ट होने का संकेत है।
दुःख या जलनइसे ‘सर्जरी’ की तरह समझें। जैसे घाव भरने से पहले दर्द होता है, वैसे ही नाम जाप अंदर की सफाई करता है।
कठिनाइयांआध्यात्मिक मार्ग बहादुरों के लिए है, आलसियों या डरपोक लोगों के लिए नहीं।

5. संसार से विरक्ति और ईश्वर से आसक्ति

एक सच्चे साधक को मान-सम्मान, धन, और सुख की इच्छा छोड़ देनी चाहिए।

  • प्रारब्ध पर विश्वास: जीवन में जो भी लाभ या हानि हो रही है, उसे ईश्वर की इच्छा या अपना ‘प्रारब्ध’ मानकर स्वीकार करें।
  • समभाव: प्रशंसा और अपमान में विचलित न हों।

6. नाम जाप की अद्भुत शक्ति

महाराज जी कहते हैं कि नाम जाप और कीर्तन से दो चीजें प्राप्त की जा सकती हैं:

  1. ज्ञान: जो साधक ज्ञान की इच्छा रखते हैं, उन्हें परम तत्व का बोध होता है।
  2. प्रेम: जो भक्त हैं, उन्हें ईश्वर का अलौकिक प्रेम प्राप्त होता है।

नाम जाप स्वयं में एक ‘योग’ है, क्योंकि यह मन को सांसारिक विचारों से हटाकर सीधे परमात्मा से जोड़ देता है। यह किसी भी अन्य साधना की तुलना में मोह और आसक्ति को सबसे तेजी से नष्ट करता है।


निष्कर्ष

प्रेमानंद महाराज जी का संदेश स्पष्ट है: नाम जाप के साथ-साथ सदाचार (Good Conduct) का होना अनिवार्य है। यदि आपकी नीयत साफ है और आप नियमों का पालन करते हुए निरंतर नाम जप करते हैं, तो ईश्वर का साक्षात्कार निश्चित है।

“नाम जाप वह औषधि है जो जन्म-मरण के रोग को जड़ से काट देती है।”


#Premanandmaharaj #naamjaap #radharadha

Leave a Comment